Saturday, June 15, 2019

Poem | Father's Day | 16 June 2019 (LYU000130)



Father's day poem | Quote | Vishal Parihar | Parinita


ऊँगली पकड़ कर चलना सिखाया 

हर मुश्किल में आगे बढ़ना सिखाया 

नम आँखें ढूंढ रही हैं, पापा !! कहाँ हो आप ?? 


मेरी पहचान, मेरा अभिमान हो आप 

मेरी शोहरत, मेरा स्वाभिमान हो आप, 

नम आँखें ढूंढ रही हैं, पापा !! कहाँ हो आप ?? 


बिन आपके, दिन, महीने, साल रही हूँ गुजार, 

जो भूले न भुला सकूँ, वो हैं मेरे पापा का प्यार 

नम आँखें ढूंढ रही हैं, पापा !! कहाँ हो आप ?? 


मंजिल हैं दूर और सफ़र बहुत है, 

आप के प्यार में पापा, आज भी असर बहुत है 

नम आँखें ढूंढ रही हैं, पापा !! कहाँ हो आप ?? 


घर में तो सब अपना प्यार दिखाते हैं 

सच तो यह है, आप आज भी बहुत याद आते हैं 

नम आँखें ढूंढ रही हैं, पापा !! कहाँ हो आप ??


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Sunday, March 10, 2019

Why a student should follow ‘The Hindu Editorial’ by Vishal sir regularly?

Why a student should follow ‘The Hindu Editorial’ by Vishal sir regularly?
Why a student should follow ‘The Hindu Editorial’ by Vishal sir regularly?


“Editorial By Vishal Sir” is now back on Wifi Study platform. It’s been around two months he’s not taken any session of the same on Adda247 YouTube channel.
Time: 07:00 AM (Monday to Sunday) Everyday
Only on WifiStudy YouTube Channel.
 Go to the Playlist: Click here

Key Features:
This is only one of the shows on YouTube that provides everything on a single platform. The following sequence makes this show more fruitful.

  • Starting with a powerful motivational quote which creates enthusiasm.
  • Providing an overview of all the Articles published in the Opinion Section
  • Explaining Vocabulary Words with Parts of Speech along with Hindi Meaning
  • Providing complete analysis of two main articles focusing on Banking and SSC exams
  • Providing Daily Questions Based on Current Affairs
  • Providing ‘’Phrasal Verbs’’ and ‘’Idioms & Phrases’’ that were used in The Hindu Newspaper
  • Providing ‘Descriptive Question’ Daily on the basis of the discussed article of the day


Tuesday, February 19, 2019

"WITHDRAWAL OF MFN STATUS" (LYU000132)

"WITHDRAWAL OF MFN STATUS"




As every Indian is in profound grief and moaning for the casualties of 40 CRPF Personnel who lose their lives due to heinous terror attack at Pulwama district in Jammu & Kashmir. In the wake of this attack, India has revoked Pakistan's most favoured status, which will affect the trade between the two nations.

Most favoured nation status is the clause under the world trade organization's (WTO) General Agreement on Tariffs & Trade (GATT). This allows the free flow of trade between the two countries. MNF is the agreement which says that the benefits and the restrictions imposed on a country will be imposed on other WTO countries. This is meant for equal treatment for trade among the countries.
In 1996, this status was given to Pakistan but Pakistan did not reciprocate it to India. Now, this withdrawal step will impose high duties on the imported goods from Pakistan this will affect the export of it.

Currently, the total trade between IND-PAK is $2billion. Pakistan imports cotton and chemicals in a heavy amount from India. Now, These industries in Pakistan will be affected by the shortage of these goods. This is a great step taken by our government. This is necessary to remove all the concessions given to Pakistan to learn them a lesson, That India gives back everything and these demises of our brave soldiers will be forgotten. this is must - "Never forget and never forgive". 
PROUD TO BE AN INDIAN- JAI HIND JAI BHARAT.




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चल, औकात से कुछ बाहर कर जाते हैं (LYU000127)


चल, औकात से कुछ बाहर कर जाते हैं


चल आज कुछ प्रण लें 
जो सबसे कठिन हो, उसे करने की ठान लें 
सुना है, सफलता तभी मिलती है,
जब औकात से कुछ बाहर कर जाते हैं।

बहुत सुन लिया औकात में रह,
तेरी औकात नहीं, तू ये कर सके,
तो इनका जवाब देने के लिए,
चल, आज औकात से कुछ बाहर कर जाते हैं।

कब तक यूँ हाथ पे हाथ रखकर बैठा रहेगा, 
इससे तेरा "टाइम नहीं आयेगा"
तो चल, एक दिन कुछ बनने के लिए,
आज, औकात से कुछ बाहर कर जाते हैं।

मत टाल, अपने काम को कल पर,
अपने हर दिन को आखिरी दिन मान के काम कर,
क्योकि भगवान भी जानता है,
तू अपनी औकात से बाहर कुछ कर सकता है।

ध्यान रख, ये समय फिर नहीं आयेगा
एक बार जो चला गया, वापस न मिल पायेगा,
फिर भी, तू क्यों कहता है, कल से करते हैं, 
चल ना, आज ही औकात से बाहर कुछ कर जाते हैं।

ये दुनिया ऐसे ही इज्जत नहीं देती, साहब
जलना पड़ता है, तपना पड़ता है, पसीना बहाना पड़ता है,
तब जाके ये "साढ़े तीन अक्षर" मिल पाते हैं,
तो क्यों न, आज औकात से कुछ बाहर कर जाते हैं।

तो उठ, माँ-बाप का आर्शीवाद लेके, 
दोस्तो का साथ लेके,
शुरु हो जाते है,
आज ही, औकात से बाहर कुछ कर जाते हैं।


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Monday, February 18, 2019

कौन सा पहलु सही है

कौन सा पहलु सही है



हाल ही की बात है, वाक्या ज़रा यूँ है कि, अधिकतर मैं और मेरे साथ काम करने वाले कुछ साथी एक ठेले पर सुबह के नाश्ते के लिए कचोडी खाने जाते थे, नाश्ते में कचोडी से बेहतर बहुत सी चीज़ें हैं परन्तु बहुत ही ज्यादा अच्छी लगने की वजह से, हम लोगों का ज्यादातर नाश्ता कचोडी से ही होता था, एक दिन हम लोग उस ठेल पर खड़े कचोडी खा ही रहे थे कि अचानक से मेरी पेंट को किसी ने हलके से खींचा, मैंने मुड कर देखा, और पाया एक पांच छ साल की छोटी सी बच्ची खड़ी है, जिसने कुछ लाल पीले मटमैले रंग का एक कुरता सा पहना हुआ है, जिसके बाल बुरी तरह से ऐंठे हुए है, मानो सालों से धुले न हों, इस गर्मी वाले मौसम में नंगे पैरों के साथ, जो धुल से भरे हुए थे, आँखो का रंग कमजोरी से पीला हो चुका था और सामने फैलाए हुए वो नन्हे नन्हे हाथ, जिनकी खाल फटी हुई और कुछ घाव हो रखे थे मेरे सामने थे...., मेरे एक हाथ में दौना और दुसरे हाथ में कचौडी थी जो मेरे मुंह तक पहुँचने ही वाली थी कि, उस बच्ची ने अपना हाथ मुंह तक ले जाकर इशारा किया, वो खाना चाहती थी, इससे पहले कि मैं कुछ कहता, मेरे साथ के एक साथी ने उस बच्ची को ज़रा ऊँची आवाज में डरा कर कहा, "जाओ यहाँ से"
बच्ची ज़रा सी कतराई, दो कदम पीछे हुई, पर गयी नहीं, मेरे हाथ में कचोडी थी जो मैंने तब तक खा ली थी, वो बच्ची वहीँ खडी रही, इतने में मेरे दुसरे साथी ने कहा "चलो ठीक है, एक इसे भी खिला दो"
पर पहले साथी ने फिर से मना किया, उनका यह मानना था, 'अगर हम आज इन्हें खिलायंगे तो इनकी भीख मांगने की आदत पड जायेगी और भविष्य में ये म़ेहनत नहीं,……भीख ही मांगेगे'
पहले साथी- "हम पैसे नहीं दे रहे हैं, उसे भूख लगी है सिर्फ खिला ही तो रहें है"
मैं चुपचाप खड़ा था और अपने दोनी साथी की बात को सुन रहा था, और मेरी नज़र लगातार उस बच्ची की हालत पर थी, उसके चेहरे की रंगत बता रही थी की वह बच्ची कितनी भूखी थी, मैंने एक कचोडी दौने में रख कर उसे दी, और वह खाने लगी, इतने में हम चले आये,…… उस दिन हम लोग इस बात पर चर्चा करते रहे कि हमे इस तरह के बच्चों को भीख देनी चाहिए या नहीं...कई बार ऐसा हुआ वह बच्ची हमे मिलती थी और हम उसे खिला दिया करते थे ……कई दिन बीते और एक रोज़ फिर से हम लोग उस ठेले पर कचोडी खाने गए और आज फिर से वही बच्ची उसी वेश-भूसा में एक और बच्ची के साथ थी और हमे देख हमारी ओर बढ़ी, और इस बार फिर उसने खाना खाने को हाथ बढाया, हर रोज़ ऐसा होने की वजह से, इस बार हम लोगों ने मना कर दिया, तो वह बच्ची रुपया मांगने लगी, हमने उसे डांट कर भगा दिया, पर वह गयी नहीं, इतने में हमारे एक साथी ने उसे एक रुपया दिया और उससे पूछा, "तुम्हे यहाँ कौन भेजता है कि हर रोज़ यहाँ आती हो?"
बच्ची- "अम्मा कहात रहीं अभई ठेलाए ते खहाय या, घरे रातइ खाना बनई"
मैं- "कहाँ रहती हो तुम?"
बच्ची ने सड़क किनारे बनी कई झोपड़ियों में से एक कि और इशारा किया और हमने उसे जाने दिया,
वे सभी झोपड़ियाँ बंजारों की थीं,
बंजारों की हालत तो आप सभी जानते ही हैं, मैं उस दिन समझ नहीं पा रहा था कि उस बच्ची को कचोडी खिला कर, सही कर रहा हूँ या नही, कहीं मैं भीख की आदत को बढ़ावा तो नहीं दे रहा हूँ...और दूसरी तरफ उनकी गरीबी से उत्पन्न मज़बूरी भी थी,
अब आप लोग बाताएँ ऐसी परिस्थिति में हमारा कौन सा पहलु सही है, मदद करना या न करना?




Written By
VISHAL PARIHAR

Sunday, February 17, 2019

Health issues and measures (LYU000117)


HEALTH ISSUES AND MEASURES 

Health is a state of complete physical, Mental and social well-being and not merely the absence of disease or infirmity. Health is essential than wealth but without wealth, there is no health. Health is very important for everyone on this globe. So everyone should be concerned about health in the Country. The increase of GDP alone does not guarantee health. However, Improvement in health does relate positively to GDP.  If you are healthy, you can develop yourself, your family and your country. You can contribute to the nation's
development. If you are healthy, you would try to make the country, healthy.    

There are various types of diseases find across the world in which cardiovascular diseases, Respiratory diseases, TB, Tumors and malignant etc. are the major. Many schemes have been launched by the Government. Pradhan Mantri Jan Aushadhi Yojana (PM-JAY) is good for peoples. in which, Generic medicines are provided, Everyone can purchase at a cheap cost. Our government has been trying continuously to combat these diseases. Try to evade yourself from such types of diseases. Many diseases occur due to filth and impurity. Nowadays, Food is also concerning matter. What types of food, you consume? There is almost adulteration in all the food items like vegetables, fruits, cereals, and groceries. Cultivators are using pesticides and herbicides to kill pest and weeds respectively, which is harmful to humans. Senior authority should be concerned and brought some technologies and methodologies which can allay these tribulations.

In the current scenario, the Government’s spending on public health is only 1.15-1.5% of GDP. Now it has been targeted to 2.5% of GDP in upcoming years.  To reach its target, the government should increase health funding by 20-25% every year for the next five years or more. National health profile of 2018, Public per capita expenditure on health increased to Rs.1112 in 2015-16 from Rs.621 in 2009-10. U.S.spends $ 10,224 per capita on healthcare per year according to 2017 data. U.S. health expenditure is 18% of GDP, while India’s is
still under 1.5%. $4000-$5000 per capita spending in other OECD (Organization for economic co-operation and development) countries is not also comparable with India’s low capital health expenditure. Now, per capita, out of pocket expenditure on health is at a massive 67%. The government has launched The Ayushman Bharat-PM-JAY(Jan Arogya Yojana) which will help to reduce out of pocket expenditure and cover over 10 crore poor and vulnerable families (approximately 50 crore beneficiaries) providing coverage up to 5 lakh rupees per family per year for secondary and tertiary care hospitalization. A beneficiary
covered under the scheme will be allowed to take cashless benefits from any public or private impaneled hospitals across the country.

The Government has announced to open 1.5 lakh health and wellness centers by 2022. However, the allocation for each of the wellness centers is less than Rs. 1 lakh per year which is a meager amount. Niti Aayog has proposed higher taxes on tobacco, alcohol and unhealthy food in order to revamp the public and preventive health system. Now, I would like to conclude that try to evade from diseases. Take proper precautions. Take proper yoga, Meditation, and workout. Sweat every day, burn your calorie. Take proper and hygienic food. keep your surroundings clean. I hope, our government shall put its efforts to combat health related issues. 
Stay clean and healthy.


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Indian Army- Our Pride (LYU000119)

INDIAN ARMY- OUR PRIDE


Indian army needs no introduction, we have love, respect and administration for our soldiers and the Indian Army as a whole.  As we all know, Indian army has a long and glorious history. Therefore it is difficult to talk about everything in such a limited space.  still I have included  all the main point and also tried to speak my heart out. Whenever I think of Indian Army I also want to become a soldier. I feel lucky to have  an institute where  we can really feel proud. Serving in the army is not a job.  It can't be a job. Army officers are well qualified to get any top rank job in the world.  It's a passion that  you do for the pride and honor of your country. 
ONCE A SOLDIER, ALWAYS A SOLDIER
They struggle, they endure everyday so that you and I can sleep in Peace.  I am quite confused  what  to write and what to left about our Indian army.  I have no words to explain their duties, their work, their responsibility and their love for the nation. Today we are safe because our soldiers are on duty 27×7 in extreme conditions.  Indian Army has never initiated the first attack to gain power.  I don't want to write any history about them and also don't want to explain their work because everyone  in the country  know their contribution. 

Once We can tolerate any type of violence but we can not tolerate any type of violence i.e. terrorism, mainly on our soldiers  Today we are safe in our country only  because  of our army. They put themselves in danger for keeping our tomorrow  safe. There have been many historical things in the Indian Army but  I pointed out only two most heinous. 
• Uri attack
• Pulwama terror attack 
In Uri, that  was an attack by four heavily armed militants on 18 sep 2016 near the town of Uri in the Indian state Jammu and Kashmir.  It was reported as a deadliest attack on security forces in Kashmir.  The militant group JAISH-E-MOHHAMAD was blamed by India of being involved in the planning and execution of the attack. In this attack our 18 Soldiers was being dead. Nearly 10 days after the uri attack, India carried out surgical strike in Pakistan occupied Kashmir. This is the best answer given by India to Pakistan.  Due to this strike Pakistan was bloody - nosed and shocked and did not admit surgical strike.  But after this strike he was well known about our power. 
And now  the second most heinous attack is the Pulwama attack.  In this attack our 44 Paramilitary personnel killed  in a car bomb attack. The responsibility of this attack is taken by militant group Masood- Azhar. Indian army is our life line .After this attack we don't want any surgical strike again.  We want more than surgical strike. We want the revenge of our  44 soldiers’ death by any means. Now it's over we can't tolerate more terrorism than this. Now we want death of militant group that was involved in this attack. We don't  want  any  relationship with  Pakistan.  We want the end of Pakistan. 

  "IF AMERICA CAN KILL BIN LADEN IN HIS HOUSE THEN WHY SHOULD NOT WE...? "




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Saturday, February 16, 2019

अंत ही आरंभ है (LYU000113)

अंत ही आरंभ है।

अंत ही आरंभ है,  शून्य ही प्रारंभ है,
चल पड़ा हूं मौज में, पूर्णता की खोज में,
दर्द ज़ख्म भूल कर, पीछे छोड़ हर कहर,
बढ़ा ही जा रहा हूं मैं, ऐ लक्ष्य! आ रहा हूं मैं,

हौसले जुटाऊंगा,  डरो को भी हराऊंगा,

अकेलापन जो था मिला, अंधेरों सा कचोटता,
उसे भी चीर आया हूं, उजाले साथ लाया हूं,

दिखूंगा एक दिन वहां,  शिखर कहे जिसे जहां।

है भाग्य की किसे फिकर? ये साथ दे या मात दे,
हुई मेरी लगन मुखर, सही तो ये ही बात है।

अंत ही आरंभ है।





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