Monday, February 18, 2019

कौन सा पहलु सही है

कौन सा पहलु सही है



हाल ही की बात है, वाक्या ज़रा यूँ है कि, अधिकतर मैं और मेरे साथ काम करने वाले कुछ साथी एक ठेले पर सुबह के नाश्ते के लिए कचोडी खाने जाते थे, नाश्ते में कचोडी से बेहतर बहुत सी चीज़ें हैं परन्तु बहुत ही ज्यादा अच्छी लगने की वजह से, हम लोगों का ज्यादातर नाश्ता कचोडी से ही होता था, एक दिन हम लोग उस ठेल पर खड़े कचोडी खा ही रहे थे कि अचानक से मेरी पेंट को किसी ने हलके से खींचा, मैंने मुड कर देखा, और पाया एक पांच छ साल की छोटी सी बच्ची खड़ी है, जिसने कुछ लाल पीले मटमैले रंग का एक कुरता सा पहना हुआ है, जिसके बाल बुरी तरह से ऐंठे हुए है, मानो सालों से धुले न हों, इस गर्मी वाले मौसम में नंगे पैरों के साथ, जो धुल से भरे हुए थे, आँखो का रंग कमजोरी से पीला हो चुका था और सामने फैलाए हुए वो नन्हे नन्हे हाथ, जिनकी खाल फटी हुई और कुछ घाव हो रखे थे मेरे सामने थे...., मेरे एक हाथ में दौना और दुसरे हाथ में कचौडी थी जो मेरे मुंह तक पहुँचने ही वाली थी कि, उस बच्ची ने अपना हाथ मुंह तक ले जाकर इशारा किया, वो खाना चाहती थी, इससे पहले कि मैं कुछ कहता, मेरे साथ के एक साथी ने उस बच्ची को ज़रा ऊँची आवाज में डरा कर कहा, "जाओ यहाँ से"
बच्ची ज़रा सी कतराई, दो कदम पीछे हुई, पर गयी नहीं, मेरे हाथ में कचोडी थी जो मैंने तब तक खा ली थी, वो बच्ची वहीँ खडी रही, इतने में मेरे दुसरे साथी ने कहा "चलो ठीक है, एक इसे भी खिला दो"
पर पहले साथी ने फिर से मना किया, उनका यह मानना था, 'अगर हम आज इन्हें खिलायंगे तो इनकी भीख मांगने की आदत पड जायेगी और भविष्य में ये म़ेहनत नहीं,……भीख ही मांगेगे'
पहले साथी- "हम पैसे नहीं दे रहे हैं, उसे भूख लगी है सिर्फ खिला ही तो रहें है"
मैं चुपचाप खड़ा था और अपने दोनी साथी की बात को सुन रहा था, और मेरी नज़र लगातार उस बच्ची की हालत पर थी, उसके चेहरे की रंगत बता रही थी की वह बच्ची कितनी भूखी थी, मैंने एक कचोडी दौने में रख कर उसे दी, और वह खाने लगी, इतने में हम चले आये,…… उस दिन हम लोग इस बात पर चर्चा करते रहे कि हमे इस तरह के बच्चों को भीख देनी चाहिए या नहीं...कई बार ऐसा हुआ वह बच्ची हमे मिलती थी और हम उसे खिला दिया करते थे ……कई दिन बीते और एक रोज़ फिर से हम लोग उस ठेले पर कचोडी खाने गए और आज फिर से वही बच्ची उसी वेश-भूसा में एक और बच्ची के साथ थी और हमे देख हमारी ओर बढ़ी, और इस बार फिर उसने खाना खाने को हाथ बढाया, हर रोज़ ऐसा होने की वजह से, इस बार हम लोगों ने मना कर दिया, तो वह बच्ची रुपया मांगने लगी, हमने उसे डांट कर भगा दिया, पर वह गयी नहीं, इतने में हमारे एक साथी ने उसे एक रुपया दिया और उससे पूछा, "तुम्हे यहाँ कौन भेजता है कि हर रोज़ यहाँ आती हो?"
बच्ची- "अम्मा कहात रहीं अभई ठेलाए ते खहाय या, घरे रातइ खाना बनई"
मैं- "कहाँ रहती हो तुम?"
बच्ची ने सड़क किनारे बनी कई झोपड़ियों में से एक कि और इशारा किया और हमने उसे जाने दिया,
वे सभी झोपड़ियाँ बंजारों की थीं,
बंजारों की हालत तो आप सभी जानते ही हैं, मैं उस दिन समझ नहीं पा रहा था कि उस बच्ची को कचोडी खिला कर, सही कर रहा हूँ या नही, कहीं मैं भीख की आदत को बढ़ावा तो नहीं दे रहा हूँ...और दूसरी तरफ उनकी गरीबी से उत्पन्न मज़बूरी भी थी,
अब आप लोग बाताएँ ऐसी परिस्थिति में हमारा कौन सा पहलु सही है, मदद करना या न करना?




Written By
VISHAL PARIHAR

Reactions:

18 comments:

  1. Very nice article sir...ha ye smjhna mushkil h ki kaun SA phlu Shi h ?
    ...hm ek br help kr skte h khana dekar ...PR br br help krenge to shyd ye bdava hoga ...JB Insan handicapped ho , old ho ...TB hme uski help krni chahiye aur tbhi hnari ki gyi help use lgegi ...

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  2. Its really a great and true story ..

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  3. Bahot tough h ye smjh pana...ki ye kiski adat h..aur kiski majburi...

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  4. Yh decided kr pna bhut hi tough h ki ye uski aadat h ya mjburi

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  5. Pahli bar help krna chahiye lekin agr 1 hi bar bar aye to use ni dena chahiye Kyunki bar bar de dene se unlog ko badhawa milegi hamesha bhIkh mangne lagenge khud se kv mehnt ni karenge wo sochenge mil hi jata h to mehnt kyu kare bt agr koi handicapped ho to unlogo kI help karni chahiye
    Bikh insan ko physically sahi hote huye v handicapped bna deti h

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  6. Sach me sir thora difficult hai samjhna but uss condition me dekh kar maya aa jata h or help kar hi dete h

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  7. Bhut mushkil h ese tym pr judge kr pana bt sbko tras aa jata h bhut bar un bacho ki halat dekh krr bt on the othr side it also hlp in increasing their greediness......bt if want to take any initiative we must strt frm theeir parents not childrens !!

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  8. Very nice article sir, help to karny chahiya but paise ya khana dekar ni balky koi rosegar dekar koi bi kamm dekar hum unki help karsaktay hai

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  9. Help करनी चाहिए sir जी,

    पेसे ना दे तो कोई बात नहीं, पर अपन किसी की भूख तो मिटा ही सकते हैं....
    -----
    Ram Choudhary your student......

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  10. Hm sbki life m akshar ye chije dekhne ko milti h.....Khi kisi ki majburi to khi kisi ne ise pesha bna liya h.....But jha tk mujhe lgta h agar ye majburi h to jarur hme inki help krni chahyie aakhir hmlog ek padhe likhe insaan h or wo v is desh ki santaan h....But yhi chije kisi ki pesha ho to hme step lene chahyie or ise badhana dekr apni hi country ko khokhala nhi krna chahyie.....I hope ki hamara india is mukaam p jld hi ho ki koi baccha khane k liye hath na failaye......
    Thanku sir for sharing a real life story

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  11. Aapne us situation me Jo kia WO bilkul sahi kiya,kisi bhukhe ko khilana koi buri BT n h,ye to sbse achi bt h,AGR hm us layak h to hmari duty h ki hmjarurat mand ki madad kre,you done right sir

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  12. Dear sir
    Mere according to ye hai ki
    Pehle to usko hlp krni hi chahiye, but agar WO fir se aa rhe hai baar baar aa rhe hai to home uss per kuchh soch vichar krni chahiye (agar hm uske liye kuchh kr skte hai to ) ki aakhir ye jo nabalig bachhe aise krte hai WO kislie krte hai.khi usko koi use to nhi kr RHA.aise hi kyi tarah Ki baato ko sochkar pehle usko jaanch krni chahiye. Ydi WO bachha kisi k under kam kr RHA hai to usko usse mukti dilani chahiye aur fir use koi kaam ( WO kr ske ) dilwa deni chahiye.
    Ydi WO wakyi garib hai tb v uski hlp krke uske parents ki hlp krke kuchh rojagar de dena chahiye.
    Aur v kyi saare ideas hai .mai yha kitna likhu.
    Thanks sir

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  13. Koi bhi "maa" roti sukhi nhi deti apne bachcho ko, maine footpath pr bhi jalte huye chulhe dekhe hai..!!

    Der se hi sahi unke ghar bhi khana bnta hi h.!!

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  14. Agr dhyan diya jaye toh dono hi points sahi h..madat krna chahiye or nhi v...
    wo choti bacchi wahi kr rhi h jo wo dekh rhi h..or uske maa papa Jo keh rhe h krne ko toh fir unka bheekh mangna kese galt hua..rhi baat parents ki toh unko atleast apne baccho se toh ye kaam nhi krwana chahiye...bahle hi wo fakir h...madat unki kro jo uske haqdaar h jo khud se kch kr nhi skte disable ho unki ya fir bhut chote baccho ki...jruri nhi h madat paise dekr ki jaye...varanasi mein toh hr road hr gali hr mandir k samne dekhne ko milta h ye sb...bacche ladies haath pakad lete h paise k liye...ye sb dekh kr bhut khrb lgta h...
    :'(
    Kya inke liye kch nhi kiya ja skta h..jisse ki inko kisi k samne haath na phelna pade... :/

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  15. This is very big problem of India as a citizen of India we should have followed such way to depreciating this.
    Nice approach sir g

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