Saturday, February 16, 2019

अंत ही आरंभ है (LYU000113)

अंत ही आरंभ है।

अंत ही आरंभ है,  शून्य ही प्रारंभ है,
चल पड़ा हूं मौज में, पूर्णता की खोज में,
दर्द ज़ख्म भूल कर, पीछे छोड़ हर कहर,
बढ़ा ही जा रहा हूं मैं, ऐ लक्ष्य! आ रहा हूं मैं,

हौसले जुटाऊंगा,  डरो को भी हराऊंगा,

अकेलापन जो था मिला, अंधेरों सा कचोटता,
उसे भी चीर आया हूं, उजाले साथ लाया हूं,

दिखूंगा एक दिन वहां,  शिखर कहे जिसे जहां।

है भाग्य की किसे फिकर? ये साथ दे या मात दे,
हुई मेरी लगन मुखर, सही तो ये ही बात है।

अंत ही आरंभ है।





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