Tuesday, February 19, 2019

चल, औकात से कुछ बाहर कर जाते हैं (LYU000127)


चल, औकात से कुछ बाहर कर जाते हैं


चल आज कुछ प्रण लें 
जो सबसे कठिन हो, उसे करने की ठान लें 
सुना है, सफलता तभी मिलती है,
जब औकात से कुछ बाहर कर जाते हैं।

बहुत सुन लिया औकात में रह,
तेरी औकात नहीं, तू ये कर सके,
तो इनका जवाब देने के लिए,
चल, आज औकात से कुछ बाहर कर जाते हैं।

कब तक यूँ हाथ पे हाथ रखकर बैठा रहेगा, 
इससे तेरा "टाइम नहीं आयेगा"
तो चल, एक दिन कुछ बनने के लिए,
आज, औकात से कुछ बाहर कर जाते हैं।

मत टाल, अपने काम को कल पर,
अपने हर दिन को आखिरी दिन मान के काम कर,
क्योकि भगवान भी जानता है,
तू अपनी औकात से बाहर कुछ कर सकता है।

ध्यान रख, ये समय फिर नहीं आयेगा
एक बार जो चला गया, वापस न मिल पायेगा,
फिर भी, तू क्यों कहता है, कल से करते हैं, 
चल ना, आज ही औकात से बाहर कुछ कर जाते हैं।

ये दुनिया ऐसे ही इज्जत नहीं देती, साहब
जलना पड़ता है, तपना पड़ता है, पसीना बहाना पड़ता है,
तब जाके ये "साढ़े तीन अक्षर" मिल पाते हैं,
तो क्यों न, आज औकात से कुछ बाहर कर जाते हैं।

तो उठ, माँ-बाप का आर्शीवाद लेके, 
दोस्तो का साथ लेके,
शुरु हो जाते है,
आज ही, औकात से बाहर कुछ कर जाते हैं।


Written By

Reactions:

12 comments: